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सोमवार, 3 जनवरी 2011

रिवाज

अपने प्रिय  कवि कबीर को याद करते हुए आपके लिए पहली पोस्ट
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रिवाज 
वे शब्द सुने जाने चाहिए 
कराहते हुए से
कलपते हुए से
विलापते हुए से शब्द
सुने जाने चाहिए
सुनी जानी चाहिए
 मद्धिम आवाज
बुदबुदाती सी आवाज
सुनी जानी चाहिए
चुप्पे की आवाज
तंत्र जो लोक का तंत्र है
गर सच माने मे  है
वह जन का तंत्र
सुनना चाहिए उसे
तरह- तरह  की आवाज
बहत धेर्य ,बहत ध्यान से
ख़त्म किया जाना चाहिए
महज और महज
शोर सुनने का रिवाज !